हमारा परिचय

हमारा उद्देश्य

हमारा मुख्य उद्देश्य है बच्चों के अंदर नैतिक, सामाजिक, और मानवीय मूल्यों का विकास करना। हम बच्चों को मंदिर के पवित्र और शांत वातावरण में शिक्षा प्रदान करके उन बातों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं जो हम रोज बोलते हैं, लेकिन जो हमारे घर में साधारण भाषा में समझाने में कठिनाई होती है। हम सभी जानते हैं की क्या सही है और क्या गलत पर क्या हम वास्तव में समय आने पर सही चुनाव कर पाते हैं ? नहीं ना, क्यूंकि जो सही गलत का आधार है वो बस हमारे लिए दूसरों की बताई हुई बातें हैं जिन्हें हम विपरीत परिस्थितियों में निभाना जरुरी नहीं समझते।

अगर हम चाहते हैं की हमारे बच्चे सही राह पर चलें तो उसके लिए जरुरी है की हम उनकी नजरिये से चीजों को देखें एवं हर सही गलत का उनका स्वयं का आधार बनाने में सहयोग करें। हमने विगत कई वर्षों में अपने स्कूल और कोचिंग में क्लास में सही गलत समझाया है और बच्चो को बहुत आत्मियता से हमारे सांस्कृतिक और मानवीय धरोहर उन्हें सौंपने की कोशिश की है पर हम बच्चों को पूर्ण रूप से सहमत करवाने में विफल रहे हैं।

क्लास में सिर्फ गर्दन हिलवाने को या सही गलत की परिभाषा रटवा देने को या सिर्फ कुछ होशियार बच्चों को संस्कार दे पाने को हम अपनी विजय नहीं मान सकते। इसलिए हमने कल्याणकुल नाम से एक मुहीम शुरू की है जिसमे हम गुरुकुल के तर्ज पर बच्चों को मंदिर/धार्मिक जगह पर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं।

इसके अलावा, हमारा मिशन है कि बच्चे स्वयंसेवा, समाज सेवा, और धार्मिकता के माध्यम से एकता और समानता के आदान-प्रदान की भावना को समझें। हम इसके माध्यम से बच्चों को समझाते हैं कि वे कैसे सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति उत्तरदायी और संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं। इसके साथ ही, हम उन्हें सिखाते हैं कि धर्म और संस्कृति का महत्व क्या है और इनका सम्बंध उनके जीवन के सभी पहलुओं से कैसे है।

हम न केवल बच्चों के शैक्षिक विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, बल्कि उनके आत्मिक और सामाजिक विकास को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। हम उन्हें विचारशील और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करने का संकल्प रखते हैं।

हमारा दृष्टिकोण

हमारा दृष्टिकोण एक समागत और पूर्णतः विकसित पाठ्यक्रम के आसपास घूमता है जो नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक शिक्षा, और शारीरिक शांति को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कहानियों, शास्त्रवाक्यों, योग की अभ्यास, और धार्मिक शब्दावली के माध्यम से, हम बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को संजीवनी देने और आत्म-जागरूकता को उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं।

हमारी विशेषता

कल्यानकुल में हमारा शैक्षिक दृष्टिकोण है, जो पारंपरिक शिक्षा को आधुनिकता के साथ मिलाकर प्रदान करता है। हमारे उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यक्तित्व और सामाजिक जिम्मेदारी के संबंध में संवेदनशील बनाने का है, ताकि वे समाज में सक्रिय और सहयोगी नागरिक बन सकें। हम आधुनिक शिक्षा तकनीकों का उपयोग करते हुए पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को समेटते हुए, मंदिर के आवास में कक्षाएं आयोजित करते हैं। यह सांस्कृतिक वातावरण विद्यार्थियों को अनुभवशील और वास्तविक शिक्षा प्रदान करता है जो हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। इस अद्वितीय दृष्टिकोण के माध्यम से, हम विद्यार्थियों को न केवल अच्छे शैक्षिक गुणवत्ता से संपन्न करते हैं, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और संस्कृति के प्रति समर्पितता के साथ विकसित भी करते हैं।

पाठ्यक्रम

कल्यानकुल का पाठ्यक्रम एक आध्यात्मिक एवं संस्कृतिक परिवेश में बच्चों के उत्कृष्ट विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। हमारा मुख्य उद्देश्य बच्चों को धार्मिक मूल्यों, संस्कृति और आध्यात्मिकता के साथ-साथ अच्छे व्यक्तित्व विकसित करना है। पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है कि बच्चे जीवन में समृद्ध और संतोषपूर्ण नागरिक बनें, जो समाज के प्रति जिम्मेदार और सहानुभूतिपूर्ण हों।

हमारा पाठ्यक्रम निम्नलिखित मुख्य विषयों पर आधारित है:

1. धार्मिक कथाएं:

हम बच्चों को हमारे पुराणों और धर्मग्रंथों से लिया गया धार्मिक संदेश और कथाएं प्रदान करते हैं। इन कहानियों के माध्यम से हम उन्हें नैतिकता, समर्पण और धार्मिक मूल्यों के महत्व को समझाते हैं।

2. श्लोक और मंत्र:

बच्चों को धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों को समझने के लिए हम उन्हें धार्मिक श्लोकों और मंत्रों का पाठ कराते हैं। इससे उनकी भावनाओं का विकास होता है और वे अपने जीवन में धार्मिकता का समर्थन करते हैं। बच्चों को शिक्षा का भाव महसूस कराने के लिए हम हमारे श्लोकों और मंत्रो की सहायता लेते हैं, इससे एक तरफ बच्चे आसानी से बड़ी बड़ी शिक्षाओं को श्लोकों और मंत्रो के माध्यम से याद रख पाते हैं वहीँ बच्चों की संस्कृत और (लोकल) भाषाओं पर पकड़ भी मजबूत होती है।

3. योग और प्राणायाम:

हम बच्चों को योग और प्राणायाम की शिक्षा देते हैं जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसके माध्यम से हम उन्हें आत्म-संयम, ध्यान और अध्यात्मिक विकास की शिक्षा प्रदान करते हैं।

4. धार्मिक और सांस्कृतिक शब्दकोश:

हम बच्चों को धार्मिक शब्दों और शब्दावली का परिचय देते हैं, जैसे प्रहर, हिन्दी महीनों के नाम, नक्षत्र आदि। इससे उनकी धार्मिक साक्षरता में सुधार होता है।

5. संगठनिक गतिविधियाँ:

हम समय-समय पर आयोजित संगठनिक गतिविधियों और समारोहों में बच्चों को शामिल करते हैं। इससे उनका सामूहिक भावनात्मक और सामाजिक विकास होता है।

6. परियोजना और प्रक्रिया:

हम अपने पाठ्यक्रम को नियंत्रित करने के लिए परियोजनाओं और प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं, जो बच्चों को संगठित और नियमित शिक्षा प्रदान करने में मदद करते हैं।

हमारा पाठ्यक्रम एक संपूर्ण विकसित और समर्थक शिक्षा प्रणाली है, जो बच्चों को समृद्ध और संतोषपूर्ण नागरिकों के रूप में तैयार करता है। इसके माध्यम से हम उन्हें आध्यात्मिकता, धार्मिकता, और समाजसेवा की भावना से परिचित कराते हैं, जो एक समृद्ध और संतुलित समाज की नींव है।

कक्षाएं

कल्यानकुल में कक्षाएं दो पालों में चलती हैं, सुबह और शाम, प्रत्येक कक्षा की अवधि 30 से 45 मिनट तक की होती है। कक्षा में छात्रों की संख्या मंदिर की क्षमता के आधार पर अलग-अलग होती है, जिससे हर छात्र को सर्वोत्तम शिक्षा परिसर मिल सके। यह संरचना ध्यान को समर्पित करने और शिक्षण समय का प्रभावी उपयोग करने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे प्रत्येक छात्र अपनी क्षमताओं का उपयोग कर सकता है। यह व्यवस्था विशेष ध्यान और सक्रिय शिक्षण को प्रोत्साहित करती है, जिससे हर छात्र अपनी शिक्षा को समय-सार्थक और प्रभावी ढंग से स्वीकार कर सके।

संदेश और संपर्क

हमें आपके संदेश का इंतजार है। यदि आपके पास कोई प्रश्न है, कोई सुझाव या फिर कोई अन्य जानकारी है जिसे आप हमारे साथ साझा करना चाहते हैं, तो कृपया हमें संपर्क करें। हमारी टीम आपके सन्देश का जवाब देने के लिए और विचार करने के लिए सदैव तत्पर है।


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